काम करो ऐसा कि पहचान बन जाये,
हर कदम ऐसा चलो कि निशान बन जाये,
यहाँ जिन्दगी तो सभी काट लेते हैं,
जिन्दगी ऐसी जियो कि मिसाल बन जाये।
विद्यालय की वेबसाईट आपको समर्पित करते हुए मुझे अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है। उत्तर प्रदेश, भारतीय संस्कृति और सभ्यता का आधार स्तंभ है, जो 2025 में नए भारत के निर्माण का प्रेरक केंद्र बन चुका है। यह राज्य अपनी ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ आधुनिकता की राह पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग, महिला सशक्तिकरण और तकनीकी नवाचार के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। यहाँ परंपरा और प्रगति का ऐसा संगम दिखाई देता है जो भारत के उज्ज्वल भविष्य की झलक प्रस्तुत करता है।
राज्य की युवा शक्ति आज तकनीकी नवाचार की प्रतीक बन चुकी है। ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी योजनाओं ने युवाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया है। नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद और कानपुर जैसे शहर अब स्टार्टअप हब के रूप में उभर रहे हैं। 2024-2025 तक 1,800 से अधिक स्टार्टअप की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश अब विचारों और नवाचारों की भूमि बन चुका है।
शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने ज्ञान और तकनीक का सुंदर संगम प्रस्तुत किया है। डिजिटल क्लासरूम और ई-लर्निंग के प्रसार ने शिक्षा को नई दिशा दी है एवं विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होना राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कौशल विकास मिशन ने युवाओं को कोडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और उद्यमिता के क्षेत्र में प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दिया है।
सामाजिक क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और लिंग समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। ‘मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाएँ चल रही हैं, इस कारण समाज में जो भी परिवर्तन हुए, वे केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी उत्तर प्रदेश ने व्यापक सुधार किए हैं। ‘आयुष्मान उत्तर प्रदेश योजना’ के माध्यम से लाखों नागरिकों को स्वास्थ्य बीमा और निःशुल्क चिकित्सा सेवाएँ प्राप्त हुई हैं।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राज्य ने हरित क्रांति का नया अध्याय लिखा है। ‘उत्तर प्रदेश ग्रीन मिशन’ के तहत करोड़ों पौधे लगाए गए हैं और जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया गया है, जो गंगा की स्वच्छता और हरित विकास योजनाएँ राज्य की पर्यावरणीय जागरूकता का परिचायक हैं।
सांस्कृतिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश आज भी भारत की आत्मा बना हुआ है। अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जैसे केंद्र अब डिजिटल माध्यमों से विश्व पटल पर अपनी पहचान को सशक्त बना रहे हैं। युवा कलाकार ऑनलाइन मंचों के माध्यम से लोक-कला, संगीत और नृत्य को नई ऊँचाइयाँ दे रहे हैं।
आज का उत्तर प्रदेश परंपरा और प्रौद्योगिकी, संस्कृति और नवाचार, श्रम और संकल्प का ऐसा संगम है जो पूरे भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। यह राज्य केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहर का रक्षक नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का पथ-प्रदर्शक है, जहाँ विकास का हर कदम ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से आलोकित है।
विद्यालय के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर विद्यालय में प्रतिवर्ष अनेक पाठ्य-सहगामी गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं। इसके अलावा अनेक जयंतियाँ विद्यालय में मनायी जाती हैं, जिससे विद्यार्थी महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने व्यक्तित्व का बहुआयामी विकास कर सकें। विद्यार्थियों की रचनात्मक एवं सृजनात्मक प्रतिभा को निखारने के लिए अनेक प्रकार की प्रतियोगिताएँ जैसे—भारत को जानो प्रतियोगिता, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, रामायण ज्ञान प्रतियोगिता, बी०एस०सी० ज्ञान प्रतियोगिता, निबन्ध प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी समय-समय पर विद्यालय में आयोजित की जाती हैं।
आज विद्यालय के छात्र खेल-कूद, एन०सी०सी०, स्काउट, विज्ञान, कला आदि के क्षेत्र में, जनपद में ही नहीं बल्कि मण्डल व राज्य स्तर पर यहाँ तक कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिभागिता कर रहे हैं। हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट बोर्ड परीक्षा 2025 में कुल 1511 छात्र सम्मिलित हुए। इतनी बड़ी छात्र संख्या होने के बावजूद इण्टर का परीक्षाफल 90.17% व हाईस्कूल का परीक्षाफल 93% रहा। प्रत्येक वर्ष विद्यालय के छात्र हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट में जनपद की ‘सम्मान सूची’ में स्थान बनाकर विद्यालय का नाम रोशन करते हैं। सन 2025 में विद्यालय के छात्र वंश शर्मा ने हाईस्कूल परीक्षा में जनपद में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। अभी हाल ही में विद्यालय के चेयरमैन डॉ० डी०के० मोदी जी के निर्देशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब प्रारम्भ की गयी, जिससे विद्यालय के छात्रों को एआई के बारे में जानकारी मिल सके। इसके लिए समस्त विद्यालय परिवार विद्यालय के चेयरमैन डॉ० डी०के० मोदी जी का आभार व्यक्त करता है। प्रबन्ध समिति के निर्देशानुसार ही विद्यालय के भूतल पर 15 कक्षों से स्मार्ट क्लास का संचालन हो रहा है। प्रबन्ध समिति का मार्गदर्शन व सहयोग एवं छात्रों को संस्कारित करने के लिए सहज मिलता रहता है।
विद्यालय में प्रत्येक कक्षा के छात्रों को चार सदनों, अब्दुल कलाम हाउस, होमी जहाँगीर भाभा हाउस, सी०वी० रमन हाउस व विक्रम साराभाई हाउस में विभाजित कर उनमें सहयोग, संयम, नेतृत्व और समस्या समाधान जैसे कौशल विकसित किये जा रहे हैं, जो विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन के लिए आवश्यक हैं, जिसके फलस्वरूप छात्र एक दूसरे से सीखते हैं और सीखने की प्रक्रिया अधिक सक्रिय और प्रभावी हो जाती है।
इसी प्रकार भारत स्काउट एवं गाइड में 10 दल पंजीकृत हैं जो प्रदेश में किसी भी विद्यालय से सर्वाधिक हैं। जिनके नाम इस प्रकार हैं—भीष्म स्काउट दल, कमल स्काउट दल, डॉ० के०एन० मोदी स्काउट दल, डॉ० अब्दुल कलाम स्काउट दल, स्वामी दयानन्द स्काउट दल, गगनयान स्काउट दल, आदित्य एल-1 स्काउट दल, मंगल मिशन स्काउट दल, चन्द्रयान मिशन स्काउट दल तथा आर्यभट्ट स्काउट दल।
आज विद्यालय के सम्पूर्ण कक्षा-कक्ष, मैदान, बरामदे आदि सी०सी०टी०वी० कैमरों से लैस हैं। विद्यालय में इंटरनेट से लैस विशाल कम्प्यूटर ए०आई० लैब व प्रोजेक्टर लैब स्थापित की गई है जिससे बच्चे तीव्रगति से सूचना एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। विज्ञान लैब का आधुनिकीकरण किया गया है। विद्यालय की सभी सूचनाएँ, गतिविधियाँ हमेशा विद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध रहती हैं।
वर्तमान परिवेश में छात्रों का भविष्य केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर भी सुरक्षित है। अन्तरराष्ट्रीय भाषा अंग्रेजी की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए, विद्यालय में 2016 से यू०पी० बोर्ड पाठ्यक्रम को हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम से भी प्रारम्भ किया गया है, जिसमें वर्तमान में लगभग 2200 छात्र हैं।
विद्यालय की उपरोक्त शानदार प्रगति के लिए मैं विद्यालय के चेयरमैन प्रतिष्ठित शिक्षाविद् प्रो० (डॉ०) डी०के० मोदी जी व प्रबन्ध समिति का आभारी हूँ, इसके साथ ही मैं विद्यालय के विद्वान शिक्षक साथियों, लिपिकों, कर्मचारियों जिनके सहयोग से संस्था निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है, का भी आभार व्यक्त करता हूँ।
डॉ० सतीशचन्द्र अग्रवाल - प्रधानाचार्य